उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली क्षेत्र में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक क्रूर हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ है। 14 जनवरी 2026 को गंग नहर के किनारे एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना पर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। मृतका की पहचान ममता पत्नी कृष्णपाल उर्फ कालिया के रूप में हुई, जो स्थानीय तगान होली चौक की निवासी थीं।
मृतका के पति की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1)/238 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में एसएसपी स्तर पर घटनास्थल का निरीक्षण हुआ और थाना खतौली, एसओजी तथा सर्विलांस टीमों की संयुक्त टीम गठित की गई।
15 जनवरी को मुखबिर से मिली सूचना पर पुलिस टीम ने गंग नहर पटरी के दूध प्लांट वाले रास्ते पर घेराबंदी कर आरोपी संदीप नामदेव पुत्र वेदप्रकाश (निवासी हौली चौक, पक्का बाग, खतौली) को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह मात्र 30 घंटे के भीतर मामले का खुलासा हो गया।
बरामद सामान:
हत्या में इस्तेमाल एक बेडशीट
एक रेहड़ा (ठेला)
मृतका का हैंडबैग जिसमें पहचान पत्र और अन्य सामान
एक नशीली टैबलेट (प्लासिडा)
पूछताछ में आरोपी का बयान:
संदीप ने बताया कि उसकी पत्नी की 2012 में मौत के बाद वह वर्मा टिफिन सेंटर से खाना लेता था, जहां ममता काम करती थीं। इसी दौरान उसने ममता से संपर्क बढ़ाया और घर पर खाना बनाने के बहाने फोन नंबर लिया। बाद में दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए और ममता ने उससे पैसे भी लिए।
जब संदीप को पता चला कि ममता अन्य लोगों से भी बात करती है, तो झगड़ा हुआ। उसने अपना प्लॉट 16 लाख में बेचा था, जिसकी जानकारी ममता को थी। 10 जनवरी को ममता ने नाती के नामकरण के लिए 5 हजार मांगे, जिससे संदीप को धोखे का शक हुआ। उसने हत्या की साजिश रची।
16 जनवरी की शाम ममता को घर बुलाया, चाय में नींद की गोली मिलाई। बेहोश होने पर सीने पर चढ़कर हाथ-पैर दबाकर मुंह-नाक बंद कर दी। फिर सेलो टेप से चेहरा लपेट दिया। मौत की पुष्टि के बाद शव को रेहड़े में डालकर बेडशीट से ढककर नहर ले गया, लेकिन शव भारी होने से नहर पटरी पर फंस गया। पर्स और मोबाइल अलग-अलग जगह फेंके। मोबाइल तोड़ने से पहले एक परिचित को कॉल कर फेक ट्रेल छोड़ी।
गिरफ्तारी में शामिल टीम: खतौली थाना प्रभारी दिनेश चन्द्र, सर्विलांस प्रभारी राजीव कुमार, एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी।
यह पुलिस की कुशल जांच और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे अपराधी को जल्दी पकड़ा गया।