उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल नवंबर में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के बाद संभल में सुनियोजित दंगों के चलते हिंदू आबादी 45 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 15 प्रतिशत रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के साथ ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है।

🔴 अखिलेश यादव ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:

"प्रदेश में भाजपाइयों और उनके साथियों द्वारा ‘पलायन का प्रोपेगंडा’ फैलाना दरअसल नौ साल पुरानी भाजपा सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।"

उन्होंने कहा कि यह नाकामी तीन स्तरों पर देखी जा सकती है:

मानसिक स्तर पर: सरकार जनता में भरोसा नहीं जगा पाई

सामाजिक स्तर पर: नफरत की राजनीति ने सौहार्द खत्म किया

आर्थिक स्तर पर: युवाओं को रोजगार देने में विफल रही

🔵 गुलाब देवी ने उठाए जनसांख्यिकीय बदलाव पर सवाल

राज्य की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी पत्रकारों से बातचीत में रिपोर्ट के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा:

"अगर जांच रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू आबादी 45% से घटकर 15% हो गई है, तो आखिर वो 30% लोग कहां गए? क्या वे पलायन कर गए, धर्म परिवर्तन कर लिया, या फिर मारे गए?"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ आंकड़ों का सवाल नहीं है, बल्कि प्रदेश की सामाजिक संरचना और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।

🔚 निष्कर्ष

संभल दंगे की जांच रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया तूफान ला दिया है। एक ओर जहां भाजपा इसे सांप्रदायिक सच्चाई का खुलासा बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे सरकार की विफलता और मिथ्या प्रचार करार दे रही है। अब देखना ये होगा कि ये रिपोर्ट आगामी चुनावों पर कितना असर डालती है।