क्या कहते हैं प्रावधान?

•अगर कोई मंत्री 30 दिन जेल में रहता है तो उसका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
•मुख्यमंत्री के मामले में 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा, वरना पद अपने आप खत्म हो जाएगा।
•प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के लिए भी यही व्यवस्था लागू होगी।
•रिहाई के बाद राष्ट्रपति या राज्यपाल चाहे तो उन्हें फिर से उसी पद पर नियुक्त कर सकते हैं।

सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि यह संशोधन स्वच्छ राजनीति और जवाबदेही लाने के लिए है। भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी नेताओं को सत्ता में बने रहने का हक नहीं होना चाहिए।

विपक्ष की आशंका

लेकिन विपक्ष इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला मान रहा है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा –

“यही फर्क है उनमें और हममें। वे संविधान को खत्म करना चाहते हैं और हम उसे बचाना चाहते हैं।”

राहुल गांधी का आरोप है कि इस कानून का इस्तेमाल सरकार विपक्ष को खत्म करने के लिए करेगी। उनके अनुसार, ईडी और सीबीआई जैसे एजेंसियों से विपक्षी नेताओं पर केस डालकर, उन्हें जेल भिजवाकर, सत्ता से हटाया जा सकता है।

बड़ा सवाल – मंशा पर शक क्यों?
•क्या यह कानून सचमुच भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति लाएगा या फिर विपक्ष को कमजोर करने का हथियार बनेगा?
•अगर कोई निर्दोष नेता केवल राजनीतिक द्वेष के कारण जेल में डाल दिया जाए तो 30 दिन बाद उसकी कुर्सी क्यों छीनी जाएगी?
•क्या सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी यही नियम सख्ती से लागू होगा?

130वां संविधान संशोधन विधेयक लोकतंत्र में एक नई बहस खड़ा कर रहा है।
जहाँ एक ओर सरकार इसे ईमानदार राजनीति की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने और संविधान की आत्मा को चोट पहुँचाने वाला कदम है।