22 हजार करोड़ से अधिक का खेल - क्यों बिक रहा है उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान का धान पंजाब और हरयाणा में ?
एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 के खरीफ सीजन में पंजाब में खरीद एजेंसियों ने मार्केटेबल सरप्लस से 159.4% और हरियाणा ने 285% अधिक धान की खरीद की इसके 1 साल पहले 2019 में पंजाब में मार्केटेबल सरप्लस की 131% और हरियाणा में 297% खरीद हुई वर्ष 2021 के पहले पूर्वानुमान के अनुसार पंजाब में 180 लाख टन धान पैदा हुआ
उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान का धान पंजाब और हरयाणा में बिक रहा है। केंद्र द्वारा पंजाब में चालू खरीफ सीजन में धान खरीद लक्ष्य 170 लाख टन निर्धारित करने के बाद से राज्य सरकार इसे बढ़ाकर 190 लाख टन किए जाने का दबाव बना रही है। पिछले वर्ष पंजाब में सरकारी धान खरीद राज्य में कुल उत्पादन से भी अधिक की गई जिसमे बासमती भी शामिल है जिस की सरकारी खरीद नहीं होती।
हरियाणा का भी हाल पंजाब जैसा ही है हरियाणा में उत्पादन के हिसाब से 150% अधिक धान की खरीद होती है।
एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 के खरीफ सीजन में पंजाब में खरीद एजेंसियों ने मार्केटेबल सरप्लस से 159.4% और हरियाणा ने 285% अधिक धान की खरीद की इसके 1 साल पहले 2019 में पंजाब में मार्केटेबल सरप्लस की 131% और हरियाणा में 297% खरीद हुई वर्ष 2021 के पहले पूर्वानुमान के अनुसार पंजाब में 180 लाख टन धान पैदा हुआ जिसके सापेक्ष 250 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य है। इस बार 133% अधिक धान खरीद का लक्ष्य है।
एफसीआई के अधिकारी मानते हैं पंजाब और हरियाणा में जो धान की खरीद होती है वह यूपी बिहार और राजस्थान से कम दाम पर खरीद कर लाई जाती है। इस खेल में आढ़ती, मंडी बोर्ड अधिकारी और खाद एवं विपणन विभाग के राज्य और केंद्र के अधिकारी तक शामिल रहते हैं। हालांकि राज्य सरकार के अधिकारी तर्क देते हैं कि सरकारी अनुमान से अधिक धान पैदा होता है और धान की किस्मे अधिक पैदावार दे रही हैं। पंजाब और हरियाणा में धान के कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बासमती है इसकी खरीदारी नहीं होती यह खुले बाजार में बिकता है। इसी तरह दूसरे राज्यों से आने वाले धान की यात्रा भी अधिक रहती है।
पंजाब कृषि विभाग के अनुसार इस साल कुल 27.36 लाख हेक्टयर धान की बुवाई की गई हे। जिसमें 6.5 लाख हेक्टयर धान गैर बासमती है। पंजाब की फाजिल्का मंडी के आढ़ती संजीव ने माना कि राजस्थान का सबसे अधिक धान पंजाब में आता है। जबकि यूपी से सीधे चावल आते हैं हालांकि उन्होंने कहा इस बार मैपिंग की गई है और किसानों ने पहली ही रजिस्ट्री करा रखी है पोर्टल पर जितना बता रहा है उतनी ही खरीद होगी सख्ती का असर दिख रहा है।