जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने कृषि बिल वापसी और एमएसपी कानून को लेकर किसान संगठनों को दी बड़ी नसीहत
कृषि कानून वापसी का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा जब तक टर्म ऑफ़ ट्रेड किसानों के पक्ष में नहीं होंगे। और ऐसे कानून की सख्त आवश्यकता है जिससे खरीद और बेच कानूनी तौर पर हो और कम मूल्य पर हुई खरीद बेच पर कार्यवाही हो
दिल्ली: कृषि कानून वापसी के ऐलान के बाद एक डिबेट में भाजपा प्रवक्ता ने कहा की एमएसपी पर कानून बनने में समय की आवश्यकता है। क्योंकि फसलों की किस्में अलग-अलग प्रकार की होती हैं। हर एक फसल की उसकी किस्म के अनुसार एमएसपी तय की जाएगी उन्होंने साथ ही कहा धान 22 किस्म का होता है। अब 22 किस्मों को एक दाम से नहीं खरीदा जा सकता।
इस पर जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा आंदोलन की शुरुआत में सरकार द्वारा कहा जाता रहा कि जब तक किसान तीनों कानून वापस लेने की जिद नहीं छोड़ेंगे तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी दूसरी ओर किसान संगठनों का कहना था कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। परंतु अब तीनों कृषि कानून वापस लिए जा रहे हैं। इसे सरकार की तरफ से एक बड़े गुडविल जेस्चर में उठाए गया कदम माना जाना चाहिए।
आंदोलन में क्या मांगे और रखनी चाहिए
कृषि कानून वापसी का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा जब तक टर्म ऑफ़ ट्रेड किसानों के पक्ष में नहीं होंगे। और ऐसे कानून की सख्त आवश्यकता है जिससे खरीद और बेच कानूनी तौर पर हो और कम मूल्य पर हुई खरीद बेच पर कार्यवाही हो इसके साथ केसी त्यागी ने कहा कि वह चौधरी चरण सिंह के समय से किसानों की मांग उठाते आए हैं। और वह सरकारों के शहरो के तरफ झुकाव के खिलाफ है, किसान के बच्चों की भागीदारी बढ़नी चाहिए जिससे गांव और किसानों की तरफ सरकारो के स्वभाव में बदलाव आए। साथ ही उन्होंने किसान आंदोलनकारियों को नसीहत दी कि वे लाभकारी मूल्य के मुद्दे को क्यों नहीं उठाते और कमीशन ऑफ़ एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइस (CACP) जो एमएसपी निर्धारित कर रही है उसका तरीका भी गलत है। साथ ही सीएसीपी (CACP) का आज कोई चेयरमैन नहीं है, और जहां 5 लोगों की कमेटी होनी चाहिए वहां सिर्फ दो लोग काम कर रहे हैं। कमीशन ऑफ़ एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइस (CACP) में किसानो की भागीदारी बढ़नी चाहिए और किसानों में जागरूकता होनी चाहिए कि उन्हें एमएसपी से ज्यादा लाभकारी मूल्य की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो प्रधानमंत्री का कदम है उसका स्वागत किसान संगठनों को करना चाहिए और उन्हें वोट की राजनीति से बचकर केवल किसान के हितों की बात उठानी चाहिए साथ ही किसान आंदोलन को हिंसा से दूर रखना चाहिए।