प्रथम नवरात्रि में मां शैलपुत्री कैसे करती हैं भक्तों की मनोकामना पूरी? जाने आज का शुभ मुहूर्त
नवरात्रों में प्रथम दिन में मां शैलपुत्री का उपवास रखा जाता है और पूजा की जाती है मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए
नवरात्रों में प्रथम दिन में मां शैलपुत्री का उपवास रखा जाता है और पूजा की जाती है मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए सदैव मनुष्य को स्वच्छ मन से और बिना छल कपट की पूजा पाठ करना चाहिए व्यक्ति के मन में किसी प्रकार का छल या कपट नहीं होना चाहिए ना ही किसी के प्रति बुरे विचार होने चाहिए मां शैलपुत्री का उपवास करने के लिए प्रातः काल स्नान करने के उपरांत सच्चे मन से मां की आराधना करनी चाहिए फल पुष्प आदि से मां का ध्यान करना चाहिए कपूर लोंग धूपबत्ती जोत आदि पूजा में अवश्य लेनी चाहिए मां की आराधना सदैव नव दुर्गा सप्तशती नामक किताब से प्रारंभ करनी चाहिए मनोकामना पूर्ति के लिए माता का मंत्र एवं नव दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य पढ़ें अवश्य मनोकामना पूर्ण होगी
शैलपुत्री माता का शुभ मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
मां शैलपुत्री कौन है कैसे इनका अवतार हुआ
हिंदू धर्म में 9 दिन के नवरात्र होते हैं जिसमें प्रत्येक व्यक्ति उपवास रखता है और भक्ति भाव से माता रानी की आराधना करता है पहला नवरात्रा मां शैलपुत्री की भक्ति में किया जाता है मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री है इन्हें सती के नाम से भी जाना जाता है जब वह सती रूप में थी तो उनके पिता प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया जिसमें उन्होंने सब को आमंत्रित किया लेकिन महादेव को आमंत्रित नहीं किया महादेव के लाख समझाने पर भी पार्वती मां सती के रूप में उस यज्ञ में गई पति को ना बुलाने का कारण पूछते हुए वह अपने पिता पर क्रोधित हो गई पिता ने फिर भी महादेव का अपमान किया तो वह उसी अग्निकुंड में कूदकर भस्म हो गई जिसके उपरांत सती का जन्म पर्वतराज हिमालय के यहां हुआ जिससे इनका नाम शैलपुत्री हुआ!!
आज का शुभ शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना मुहूर्त आज 7 अक्टूबर से नवरात्रों का प्रारंभ है कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 6:15 से 7:00 पर 6 मिनट तक का रहेगा