मां चंद्रघंटा ने कैसे लिया अवतार कैसे करें माता रानी का पूजन और मंत्र का उच्चारण
मां चंद्रघंटा की उपासना नवरात्र के तीसरे दिन में की जाती है स्वच्छ जल से स्नान करने के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए औ
मां चंद्रघंटा की कथा नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है मां चंद्रघंटा के मस्तक पर आधा चंद्रमा विराजमान है एक बार देवों और दानवों के युद्ध में दानवों और देवताओं के बीच बहुत वर्षों तक युद्ध हुआ!
देवताओं के स्वामी इंद्र और राक्षसों का स्वामी महिषासुर था बहुत वर्षों तक युद्ध चलने के बाद देवताओं की सेना बहुत बार राक्षसों से पराजित हुई और फिर 1 दिन ऐसा आया जब देवताओं पर विजय पाकर महिषासुर स्वयं इंद्र बन बैठा सभी देवता पराजित होकर दुखी भाव से भगवान ब्रह्मा के पास गए ब्रह्मा जी ने उन्हें महादेव और विष्णु भगवान की शरण में जाने को कहा तत्पश्चात देवताओं ने उन्हें बताया कि राक्षसों ने सूर्य इंद्र अग्नि वायु चंद्रमा एवं अन्य सभी देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और सभी को बंधक बनाकर स्वयं इंद्र बन बैठा है और खुद को सब का राजा बता रहा है
उस के प्रकोप से देवता धरती पर विचरण कर रहे हैं ऐसा सुनकर महादेव और भगवान विष्णु अत्यंत क्रोधित हुए और क्रोध के कारण त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महादेव के मुख से एक तेज उत्पन्न हुआ एवं सभी देवताओं के मुख से भी तेज उत्पन्न हुआ सभी के तेज से मिलकर एक महान आकार की आकृति बनी जो एक पर्वत की तरह दिखाई पड़ रही थी जो दसों दिशाओं को प्रकाशित कर रही थी सभी देवताओं के तेज से मिलकर एक देवी प्रकट हुई देवी को देखकर पूरा ब्रह्मलोक खुशी से झूम उठा सभी देवताओं ने मिलकर देवी को सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए सभी अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित होकर मां महिषासुर मर्दिनी युद्ध के लिए लाल-लाल नेत्र करके विकट गर्जना करती हुई महिषासुर की सेना की ओर दौड़ी और एक एक करके अपने अस्त्र-शस्त्र उसे सब को मार गिराया साथ ही माता रानी का शेर भी गुस्से से अपनी गर्दन के बाल हिलाता हुआ गर्जना करने लगा शेर की श्वास से सैकड़ों गण पैदा हुए जो राक्षसों की सेना पर टूट पड़े
माता ने एक-एक कर सब को मार गिराया महिषासुर माता की ओर दौड़ा मुट्ठी प्रहार किया और वह पृथ्वी पर गिर पड़ा तो माता ने गुस्से में लाल नेत्र करके घंटा बजाया जिससे पूरी पृथ्वी गूंज उठी और महिषासुर को आकाश में ले जाकर माता ने उससे बाहु युद्ध किया और जमीन पर पटक कर महिषासुर को मार गिराया इससे देवता बहुत प्रसन्न हुए और माता पर पुष्पों की बरसात की महिषासुर का वध करने वाली मां को चंद्रघंटा के नाम से पुकारा गया
मां चंद्रघंटा की उपासना नवरात्र के तीसरे दिन में की जाती है स्वच्छ जल से स्नान करने के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और माता को फल पुष्प दीप आदि अर्पित करने चाहिए और माता रानी का सप्तशती पाठ अवश्य करना चाहिए जिससे माता सदैव अपने भक्तों पर प्रसन्न रहती है और सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति देती है और सब की मनोकामना पूर्ण करती है
चंद्रघंटा का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां चंद्रघंटा के मंत्र का जप सदैव करते रहना चाहिए इससे मनुष्य के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और उसे अकाल मृत्यु नहीं आती मनुष्य शत्रु पर सदैव विजय पाता है